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May 24, 2021

The Unanswered Question

हर दिन की तरह आज भी ध्यान करने बैठा तो हर दिन की तरह गिलहरी आई....

पर आज वो अकेली थी ,

ना पास आई....

न वो ख़ुशी थी....

ना उसके आँखों में वो चहक...

जो उसमे हर दिन होती थी  !


बस थोड़ी दुरी पर बैठकर देखती रही......आँखों में आंसू लिए और जाने कितने सवाल लिए 

थोडा दाना खाया पानी पिया और चली गयी 

लेकिन पास नहीं आई !

चिड़ियों की चहचहाहट कल दोपहर से ही ज्यादा थी 

वो आज भी आस - पास थी लेकिन वो  चहचहाहट कई प्रश्नों के साथ - मन में पीड़ा लिए हुए थी 


पहली बार ध्यान के समय किसी पंछी ने चोंच मारी सर पर....वैसे तो ऐसा अक्सर होता है लेकीन  आज की चोट में गुस्सा था  

वो प्यार नहीं !

सर में हल्का घाव हो गया 

माते ने कहा आज बहोत सारी चिड़ियाँ आई है और आवाज कितना अच्छा लग रहा है 




हमने कुछ नहीं बोला क्यूंकि उस आवाज के दर्द को मैंने महसूस किया था......वह उनकी चहचहाहट नहीं उनका दर्द था जो की कोई मानव नहीं समझ रहा था क्यूंकि निज स्वार्थ के आगे कोई कहाँ किसी का दर्द समझ पाता है 




कल चार पेड़ो को काट दिया गया......सिर्फ इसलिए की उससे पत्ते गिरते थे उनके घरों पर 

तो उन्होंने उनके घरों को गिरा दिया.....जो अपना दर्द - आंसू किसी को न तो दिखा सकते हैं न समझा सकते है ना बता सकते हैं 


तो उन्होंने उसे काटकर अपना घर बचा लिया......पांचवे पेड़ को भी काटने वाले थे 







 
वैसे पहले पेड़ के काटने के बाद से ही चिड़िया मेरे कमरे के खिड़की के पास आकर चिल्लाना शुरू कर दिया था |


 





 जब मना करने के लिए जा रहा था तो माते ने रोका की उनकी जमीन है तुमसे क्या मतलब है !

वापस  जाकर बैठा लेकिन चिड़ियों की आवाज से बैठा न गया 

मैंने सीधे जाकर से गुस्से में बोला.....कैसा लगेगा अगर भगवन तुम्हारा सारा  घर-बच्चे तुमसे एकाएक छीन ले !

बिना किसी गलती के !

इतना बोलकर मै चला आया 

उसके बाद लोगो ने आखिरी पांचवे पेड़ को नहीं काटा  | वह पेड़ तो बचा रह गया लेकिन वो सब जो घर उजाड़ हो गए उनको न बचा सका 





करीब एक साल पहले घर में कोबरा सर्प चिड़ियों का शिकार करने आ गया था छत पर तो माते और बहनों ने कहा की उसे मार दो !


मैंने बोला की वो अपने भोजन के लिए आया है न की तुम्हे या किसी को  काटने तो मैं उसे भगाउंगा न की मरूँगा और अगर मारना भी पडा तो वो आखिरी विकल्प होगा न की पहला  

मैंने घर से केरोसिन का तेल मंगाया और घेरा बना दिया जिससे की वो दायरे से बाहर ना आये और जहाँ वह छुपा था वहां आग लगा दी गर्मी से परेशान हो कर वो केरोसिन के तेल के दायरे से होता हुआ घर से बाहर चला गया 



इस घटना के कुछ दिन बाद ही पेड़ से होकर एक बिना जहर वाला साँप ( धामिन ) पडोसी के छत पर चढ़ गया और मेरी माते ने देख लिया तो हल्ला मचा दिया 


शोर सुनकर जब मै ऊपर पंहुचा तो देखा की लोग उसको मारने की तैयारी कर लिए थे 


मैंने अपनी छत से लोगों को डाटा की एक तो वो जहरीला नहीं है और ऊपर से उसने किसी का कुछ बिगाड़ा नहीं है ......तो क्यों मरने के लिए पागल हुए जा रहे हो 

वो खुद चला जायेगा.....कुछ समय बाद वो चला भी गया 


लोग अपने घरों को लौट गए !

लेकिन शाम जब छत पर गया तो देखा की उन लोगों ने वो पेड़ काट दिया था जिससे वो ऊपर चढ़ा था |



हर दिन की तरह  उस दिन अपनी हरी चाय पीते हुए ये सोच रहा था की मैंने क्या ठीक किया ?

एक निरीह - निरपराधी  जीवन तो बचा लिया लेकीन लेकिन एक जीवन भी ले लिया !

वो  जीवन जो जाने कितनो को नव जीवन देता ?

क्या मै उसे बचा सकता था !



फिर चाय से ध्यान अपने खो चुके प्रेमिका की यादों में चला गया.......वह चाय का वादा जो कभी पूरा न हो सका 

जो दुनिया में एक बदलाव ला सकती थी !

जो विश्व को एक नयी दिशा दे सकती थी !

जो जाने कितनो को नव जीवन दे सकती थी  ?


क्या मै उसे बचा सकता था...............!



( Don't Know it's Good thing or Bad Thing

Whatever i do....

Wherever i go.....

I miss him....


Miss him with......question on myself ! 


The Question which will never be answered )

















Feb 3, 2021

बलात्कार का इतिहास

 इतिहास के अनुसार "यौन अपराध" इस्लाम की देन है

अद्भूत लेख

~बलात्कार का आरंभ~

आखिर भारत जैसे देवियों को पूजने वाले देश में बलात्कार की गन्दी मानसिकता कहाँ से आयी |

आखिर क्या बात है कि जब प्राचीन भारत के रामायण, महाभारत आदि लगभग सभी हिन्दू-ग्रंथ के उल्लेखों में अनेकों लड़ाईयाँ लड़ी और जीती गयीं, परन्तु विजेता सेना द्वारा किसी भी स्त्री का बलात्कार होने का जिक्र नहीं है।

तब आखिर ऐसा क्या हो गया ??
कि आज के आधुनिक भारत में बलात्कार रोज की सामान्य बात बन कर रह गयी है ??

श्री राम ने लंका पर विजय प्राप्त की पर न ही उन्होंने और न उनकी सेना ने पराजित लंका की स्त्रियों को हाथ लगाया ।
महाभारत में पांडवों की जीत हुयी लाखों की संख्या में योद्धा मारे गए। पर किसी भी पांडव सैनिक ने किसी भी कौरव सेना की विधवा स्त्रियों को हाथ तक न लगाया ।



अब आते हैं ईसापूर्व इतिहास में

220-175 ईसापूर्व में यूनान के शासक "डेमेट्रियस प्रथम" ने भारत पर आक्रमण किया। 183 ईसापूर्व के लगभग उसने पंजाब को जीतकर साकल को अपनी राजधानी बनाया और पंजाब सहित सिन्ध पर भी राज किया। लेकिन उसके पूरे समयकाल में बलात्कार का कोई जिक्र नहीं।
इसके बाद "युक्रेटीदस" भी भारत की ओर बढ़ा और कुछ भागों को जीतकर उसने "तक्षशिला" को अपनी राजधानी बनाया। बलात्कार का कोई जिक्र नहीं।

"डेमेट्रियस" के वंश के मीनेंडर (ईपू 160-120) ने नौवें बौद्ध शासक "वृहद्रथ" को पराजित कर सिन्धु के पार पंजाब और स्वात घाटी से लेकर मथुरा तक राज किया परन्तु उसके शासनकाल में भी बलात्कार का कोई उल्लेख नहीं मिलता।

"सिकंदर" ने भारत पर लगभग 326-327 ई .पू आक्रमण किया जिसमें हजारों सैनिक मारे गए । इसमें युद्ध जीतने के बाद भी राजा "पुरु" की बहादुरी से प्रभावित होकर सिकंदर ने जीता हुआ राज्य पुरु को वापस दे दिया और "बेबिलोन" वापस चला गया ।
विजेता होने के बाद भी "यूनानियों" (यवनों) की सेनाओं ने किसी भी भारतीय महिला के साथ बलात्कार नहीं किया और न ही "धर्म परिवर्तन" करवाया ।


इसके बाद "शकों" ने भारत पर आक्रमण किया (जिन्होंने ई.78 से शक संवत शुरू किया था)। "सिन्ध" नदी के तट पर स्थित "मीननगर" को उन्होंने अपनी राजधानी बनाकर गुजरात क्षेत्र के सौराष्ट्र , अवंतिका, उज्जयिनी,गंधार,सिन्ध,मथुरा समेत महाराष्ट्र के बहुत बड़े भू भाग पर 130 ईस्वी से 188 ईस्वी तक शासन किया। परन्तु इनके राज्य में भी बलात्कार का कोई उल्लेख नहीं।

इसके बाद तिब्बत के "युइशि" (यूची) कबीले की लड़ाकू प्रजाति "कुषाणों" ने "काबुल" और "कंधार" पर अपना अधिकार कायम कर लिया। जिसमें "कनिष्क प्रथम" (127-140ई.) नाम का सबसे शक्तिशाली सम्राट हुआ।जिसका राज्य "कश्मीर से उत्तरी सिन्ध" तथा "पेशावर से सारनाथ" के आगे तक फैला था। कुषाणों ने भी भारत पर लम्बे समय तक विभिन्न क्षेत्रों में शासन किया। परन्तु इतिहास में कहीं नहीं लिखा कि इन्होंने भारतीय स्त्रियों का बलात्कार किया हो ।

इसके बाद "अफगानिस्तान" से होते हुए भारत तक आये "हूणों" ने 520 AD के समयकाल में भारत पर अधिसंख्य बड़े आक्रमण किए और यहाँ पर राज भी किया। ये क्रूर तो थे परन्तु बलात्कारी होने का कलंक इन पर भी नहीं लगा।

इन सबके अलावा भारतीय इतिहास के हजारों साल के इतिहास में और भी कई आक्रमणकारी आये जिन्होंने भारत में बहुत मार काट मचाई जैसे "नेपालवंशी" "शक्य" आदि। पर बलात्कार शब्द भारत में तब तक शायद ही किसी को पता था।






अब आते हैं मध्यकालीन भारत में




जहाँ से शुरू होता है इस्लामी आक्रमण...
और यहीं से शुरू होता है भारत में बलात्कार का प्रचलन !
सबसे पहले 711 ईस्वी में "मुहम्मद बिन कासिम" ने सिंध पर हमला करके राजा "दाहिर" को हराने के बाद उसकी दोनों "बेटियों" को "यौनदासियों" के रूप में "खलीफा" को तोहफा भेज दिया।
तब शायद भारत की स्त्रियों का पहली बार बलात्कार जैसे कुकर्म से सामना हुआ जिसमें "हारे हुए राजा की बेटियों" और "साधारण भारतीय स्त्रियों" का "जीती हुयी इस्लामी सेना" द्वारा बुरी तरह से बलात्कार और अपहरण किया गया ।
फिर आया 1001 इस्वी में "गजनवी"। इसके बारे में ये कहा जाता है कि इसने "इस्लाम को फ़ैलाने" के उद्देश्य से ही आक्रमण किया था।
"सोमनाथ के मंदिर" को तोड़ने के बाद इसकी सेना ने हजारों "काफिर औरतों" का बलात्कार किया फिर उनको अफगानिस्तान ले जाकर "बाजारों में बोलियाँ" लगाकर "जानवरों" की तरह "बेच" दिया ।
फिर "गौरी" ने 1192 में "पृथ्वीराज चौहान" को हराने के बाद भारत में "इस्लाम का प्रकाश" फैलाने के लिए "हजारों काफिरों" को मौत के घाट उतर दिया और उसकी "फौज" ने "अनगिनत हिन्दू स्त्रियों" के साथ बलात्कार कर उनका "धर्म-परिवर्तन" करवाया।
ये विदेशी मुस्लिम अपने साथ औरतों को लेकर नहीं आए थे।
मुहम्मद बिन कासिम से लेकर सुबुक्तगीन, बख्तियार खिलजी, जूना खाँ उर्फ अलाउद्दीन खिलजी, फिरोजशाह, तैमूरलंग, आरामशाह, इल्तुतमिश, रुकुनुद्दीन फिरोजशाह, मुइजुद्दीन बहरामशाह, अलाउद्दीन मसूद, नसीरुद्दीन महमूद, गयासुद्दीन बलबन, जलालुद्दीन खिलजी, शिहाबुद्दीन उमर खिलजी, कुतुबुद्दीन मुबारक खिलजी, नसरत शाह तुगलक, महमूद तुगलक, खिज्र खां, मुबारक शाह, मुहम्मद शाह, अलाउद्दीन आलम शाह, बहलोल लोदी, सिकंदर शाह लोदी, बाबर, नूरुद्दीन सलीम जहांगीर,..... अपने हरम में "8000 रखैलें रखने वाला शाहजहाँ"।
इसके आगे अपने ही दरबारियों और कमजोर मुसलमानों की औरतों से अय्याशी करने के लिए "मीना बाजार" लगवाने वाला "जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर" या "अकबर महान "।
मुहीउद्दीन मुहम्मद से लेकर औरंगजेब तक बलात्कारियों की ये सूची बहुत लम्बी है। जिनकी फौजों ने हारे हुए राज्य की लाखों "काफिर महिलाओं" "(माल-ए-गनीमत)" का बेरहमी से बलात्कार किया और "जेहाद के इनाम" के तौर पर कभी वस्तुओं की तरह "सिपहसालारों" में बांटा तो कभी बाजारों में "जानवरों की तरह उनकी कीमत लगायी" गई।

ये असहाय और बेबस महिलाएं "हरमों" से लेकर "वेश्यालयों" तक में पहुँची। इनकी संतानें भी हुईं पर वो अपने मूलधर्म में कभी वापस नहीं पहुँच पायीं।
एकबार फिर से बता दूँ कि मुस्लिम "आक्रमणकारी" अपने साथ "औरतों" को लेकर नहीं आए थे।
वास्तव में मध्यकालीन भारत में मुगलों द्वारा "पराजित काफिर स्त्रियों का बलात्कार" करना एक आम बात थी क्योंकि वो इसे "अपनी जीत" या "जिहाद का इनाम" (माल-ए-गनीमत) मानते थे।
केवल यही नहीं इन सुल्तानों द्वारा किये अत्याचारों और असंख्य बलात्कारों के बारे में आज के किसी इतिहासकार ने नहीं लिखा।( इनके अत्याचारों को कुछ गिने चुने गुरुकुलों में ही जानकारी सुरक्षित है वह भी जीर्णावस्था में )

बल्कि खुद इन्हीं सुल्तानों के साथ रहने वाले लेखकों ने बड़े ही शान से अपनी कलम चलायीं और बड़े घमण्ड से अपने मालिकों द्वारा काफिरों को सबक सिखाने का विस्तृत वर्णन किया।
गूगल के कुछ लिंक्स पर क्लिक करके हिन्दुओं और हिन्दू महिलाओं पर हुए "दिल दहला" देने वाले अत्याचारों के बारे में विस्तार से जान पाएँगे। वो भी पूरे सबूतों के साथ। लेकिन वहां पर भी अल्प जानकारी है क्यूंकि तथ्यों को नष्ट करना इन्होने पहले से ही सिख लिया था और वह काम आज भी बखूबी कर रहें हैं

इनके सैकड़ों वर्षों के खूनी शासनकाल में भारत की हिन्दू जनता अपनी महिलाओं का सम्मान बचाने के लिए देश के एक कोने से दूसरे कोने तक भागती और बसती रहीं।
इन मुस्लिम बलात्कारियों से सम्मान-रक्षा के लिए हजारों की संख्या में हिन्दू महिलाओं ने स्वयं को जौहर की ज्वाला में जलाकर भस्म कर लिया।

ठीक इसी काल में कभी स्वच्छंद विचरण करने वाली भारतवर्ष की हिन्दू महिलाओं को भी मुस्लिम सैनिकों की दृष्टि से बचाने के लिए पर्दा-प्रथा की शुरूआत हुई।

महिलाओं पर अत्याचार और बलात्कार का इतना घिनौना स्वरूप तो 17वीं शताब्दी के प्रारंभ से लेकर 1947 तक अंग्रेजों की ईस्ट इंडिया कंपनी के शासनकाल में भी नहीं दिखीं। अंग्रेजों ने भारत को बहुत लूटा परन्तु बलात्कारियों में वे नहीं गिने जाते।

1946 में मुहम्मद अली जिन्ना के डायरेक्टर एक्शन प्लान, 1947 विभाजन के दंगों से लेकर 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम तक तो लाखों काफिर महिलाओं का बलात्कार हुआ या फिर उनका अपहरण हो गया। फिर वो कभी नहीं मिलीं।

इस दौरान स्थिती ऐसी हो गयी थी कि "पाकिस्तान समर्थित मुस्लिम बहुल इलाकों" से "बलात्कार" किये बिना एक भी "काफिर स्त्री" वहां से वापस नहीं आ सकती थी।
जो स्त्रियाँ वहां से जिन्दा वापस आ भी गयीं वो अपनी जांच करवाने से डरती थी।
जब डॉक्टर पूछते क्यों तब ज्यादातर महिलाओं का एक ही जवाब होता था कि "हमपर कितने लोगों ने बलात्कार किये हैं ये हमें भी पता नहीं"।
विभाजन के समय पाकिस्तान के कई स्थानों में सड़कों पर काफिर स्त्रियों की "नग्न यात्राएं (धिंड) "निकाली गयीं, "बाज़ार सजाकर उनकी बोलियाँ लगायी गयीं"
और 10 लाख से ज्यादा की संख्या में उनको दासियों की तरह खरीदा बेचा गया।
20 लाख से ज्यादा महिलाओं को जबरन मुस्लिम बना कर अपने घरों में रखा गया। (देखें फिल्म "पिंजर" और पढ़ें पूरा सच्चा इतिहास गूगल पर)।
इस विभाजन के दौर में हिन्दुओं को मारने वाले सबके सब विदेशी नहीं थे। इन्हें मारने वाले स्थानीय मुस्लिम भी थे।
वे समूहों में कत्ल से पहले हिन्दुओं के अंग-भंग करना, आंखें निकालना, नाखुन खींचना, बाल नोचना, जिंदा जलाना, चमड़ी खींचना खासकर महिलाओं का बलात्कार करने के बाद उनके "स्तनों को काटकर" तड़पा-तड़पा कर मारना आम बात थी।




अंत में कश्मीर की बात
19 जनवरी 1990

सारे कश्मीरी पंडितों के घर के दरवाजों पर नोट लगा दिया जिसमें लिखा था~ "या तो मुस्लिम बन जाओ या मरने के लिए तैयार हो जाओ या फिर कश्मीर छोड़कर भाग जाओ लेकिन अपनी औरतों को यहीं छोड़कर "

लखनऊ में विस्थापित जीवन जी रहे कश्मीरी पण्डित संजय बहादुर उस मंजर को याद करते हुए आज भी सिहर जाते हैं।
वह कहते हैं कि "मस्जिदों के लाउडस्पीकर" लगातार तीन दिन तक यही आवाज दे रहे थे कि यहां क्या चलेगा, "निजाम-ए-मुस्तफा", 'आजादी का मतलब क्या "ला इलाहा इलल्लाह", 'कश्मीर में अगर रहना है, "अल्लाह-ओ-अकबर" कहना है।

और 'असि गच्ची पाकिस्तान, बताओ "रोअस ते बतानेव सान" जिसका मतलब था कि हमें यहां अपना पाकिस्तान बनाना है, कश्मीरी पंडितों के बिना मगर कश्मीरी पंडित महिलाओं के साथ।
सदियों का भाईचारा कुछ ही समय में समाप्त हो गया जहाँ पंडितों से ही तालीम हासिल किए लोग उनकी ही महिलाओं की अस्मत लूटने को तैयार हो गए थे।
सारे कश्मीर की मस्जिदों में एक टेप चलाया गया। जिसमें मुस्लिमों को कहा गया की वो हिन्दुओं को कश्मीर से निकाल बाहर करें। उसके बाद कश्मीरी मुस्लिम सड़कों पर उतर आये।
उन्होंने कश्मीरी पंडितों के घरों को जला दिया, कश्मीर पंडित महिलाओ का बलात्कार करके, फिर उनकी हत्या करके उनके "नग्न शरीर को पेड़ पर लटका दिया गया"।
कुछ महिलाओं को बलात्कार कर जिन्दा जला दिया गया और बाकियों को लोहे के गरम सलाखों से मार दिया गया।
कश्मीरी पंडित नर्स जो श्रीनगर के सौर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में काम करती थी, का सामूहिक बलात्कार किया गया और मार मार कर उसकी हत्या कर दी गयी।
बच्चों को उनकी माँओं के सामने स्टील के तार से गला घोंटकर मार दिया गया।
कश्मीरी काफिर महिलाएँ पहाड़ों की गहरी घाटियों और भागने का रास्ता न मिलने पर ऊंचे मकानों की छतों से कूद कूद कर जान देने लगी।

लेखक राहुल पंडिता उस समय 14 वर्ष के थे। बाहर माहौल ख़राब था। मस्जिदों से उनके ख़िलाफ़ नारे लग रहे थे। पीढ़ियों से उनके भाईचारे से रह रहे पड़ोसी ही कह रहे थे, 'मुसलमान बनकर आज़ादी की लड़ाई में शामिल हो या वादी छोड़कर भागो'।

राहुल पंडिता के परिवार ने तीन महीने इस उम्मीद में काटे कि शायद माहौल सुधर जाए। राहुल आगे कहते हैं, "कुछ लड़के जिनके साथ हम बचपन से क्रिकेट खेला करते थे वही हमारे घर के बाहर पंडितों के ख़ाली घरों को आपस में बांटने की बातें कर रहे थे और हमारी लड़कियों के बारे में गंदी बातें कह रहे थे। ये बातें मेरे ज़हन में अब भी ताज़ा हैं।

1989 में कश्मीर में जिहाद के लिए गठित जमात-ए-इस्लामी संगठन का नारा था- 'हम सब एक, तुम भागो या मरो'।

घाटी में कई कश्मीरी पंडितों की बस्तियों में सामूहिक बलात्कार और लड़कियों के अपहरण किए गए। हालात और बदतर हो गए थे।
कुल मिलाकर हजारों की संख्या में काफिर महिलाओं का बलात्कार किया गया।

आज आप जिस तरह दाँत निकालकर धरती के जन्नत कश्मीर घूमकर मजे लेने जाते हैं और वहाँ के लोगों को रोजगार देने जाते हैं। उसी कश्मीर की हसीन वादियों में आज भी सैकड़ों कश्मीरी हिन्दू बेटियों की बेबस कराहें गूंजती हैं, जिन्हें केवल काफिर होने की सजा मिली।

घर, बाजार, हाट, मैदान से लेकर उन खूबसूरत वादियों में न जाने कितनी जुल्मों की दास्तानें दफन हैं जो आज तक अनकही हैं। घाटी के खाली, जले मकान यह चीख-चीख के बताते हैं कि रातों-रात दुनिया जल जाने का मतलब कोई हमसे पूछे। झेलम का बहता हुआ पानी उन रातों की वहशियत के गवाह हैं जिसने कभी न खत्म होने वाले दाग इंसानियत के दिल पर दिए।
लखनऊ में विस्थापित जीवन जी रहे कश्मीरी पंडित रविन्द्र कोत्रू के चेहरे पर अविश्वास की सैकड़ों लकीरें पीड़ा की शक्ल में उभरती हुईं बयान करती हैं कि यदि आतंक के उन दिनों में घाटी की मुस्लिम आबादी ने उनका साथ दिया होता जब उन्हें वहां से खदेड़ा जा रहा था, उनके साथ कत्लेआम हो रहा था तो किसी भी आतंकवादी में ये हिम्मत नहीं होती कि वह किसी कश्मीरी पंडित को चोट पहुंचाने की सोच पाता लेकिन तब उन्होंने हमारा साथ देने के बजाय कट्टरपंथियों के सामने घुटने टेक दिए थे या उनके ही लश्कर में शामिल हो गए थे।

अभी हाल में ही आपलोगों ने टीवी पर "अबू बकर अल बगदादी" के जेहादियों को काफिर "यजीदी महिलाओं" को रस्सियों से बाँधकर कौड़ियों के भाव बेचते देखा होगा।

पाकिस्तान में खुलेआम हिन्दू लड़कियों का अपहरण कर सार्वजनिक रूप से मौलवियों की टीम द्वारा धर्मपरिवर्तन कर निकाह कराते देखा होगा।

बांग्लादेश से भारत भागकर आये हिन्दुओं के मुँह से महिलाओं के बलात्कार की हजारों मार्मिक घटनाएँ सुनी होंगी।

यहाँ तक कि म्यांमार में भी एक काफिर बौद्ध महिला के बलात्कार और हत्या के बाद शुरू हुई हिंसा के भीषण दौर को देखा होगा।

केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनियाँ में इस सोच ने मोरक्को से ले कर हिन्दुस्तान तक सभी देशों पर आक्रमण कर वहाँ के निवासियों को धर्मान्तरित किया, संपत्तियों को लूटा तथा इन देशों में पहले से फल फूल रही हजारों वर्ष पुरानी सभ्यता का विनाश कर दिया।


परन्तु पूरी दुनियाँ में इसकी सबसे ज्यादा सजा महिलाओं को ही भुगतनी पड़ी...बलात्कार के रूप में ।

आज सैकड़ों साल की गुलामी के बाद समय बीतने के साथ धीरे-धीरे ये बलात्कार करने की मानसिक बीमारी भारत के पुरुषों में भी फैलने लगी है।

जिस देश में कभी नारी जाति शासन करती थीं, सार्वजनिक रूप से शास्त्रार्थ करती थीं, स्वयंवर द्वारा स्वयं अपना वर चुनती थीं, जिन्हें भारत में देवियों के रूप में श्रद्धा से पूजा जाता था आज उसी देश में छोटी-छोटी बच्चियों तक का बलात्कार होने लगा और आज इस मानसिक रोग का ये भयानक रूप देखने को मिल रहा है |


जिस देश में कभी मर्यादा प्राण से भी बढ़कर होती थी वहाँ विवाह पूर्व सम्बन्ध आम हो गए हैं | अमर्यादित सम्बन्धों को बढ़ावा देने वाले टीवी कार्यकर्म व् इन्टरनेट पर अशलीलता परोसने वाले तमाम माध्यम लोगों के विचारों को दूषित कर रहे हैं जिससे की समाज में अनाचार दिनों दिन बढ़ता जा रहा है |



(स्रोत - "Our Moon Has Blood Clots" By Rahul Pandita
"Bleeding India " By Binay Kumar Singh
"चुनौतियों से घिरा भारत" - शिवकुमार गोयल
"Geeta Press And Making of India " By Akashya Mukul
"A History of Ancient and Early Medieval India: From the Stone Age to the 12th Century (PB)" By Upinder Singh  

Ground Survey in Delhi and Lucknow
Discussion with Acharyas of Various Gurukulams - Patanjali Yogpith's Social Workers )


- आकाश आर्यावर्त 





Jan 25, 2021

The Atheist Vs God

When you think in terms of Vibrations then everything will lead you to the vibrations Then first you will be converted into an Atheist .



But when go in advanced level of your consciousness you see the " Energy Pattern of vibrations "



You will accept the Identity of " Brhma " within you ....."अहम् ब्रह्मास्मि "

( In fact Lord Brhma is Universe Element or Universe's Energy Pattern.....that creates new cells in body and new things in universe.....May say lord of Creation )


Then you will accept the identity of God .

( In terms of meditation experience )






So , when someone says that he / she is atheist then it means that person is just kid .

Although ,

Experiencing the vibes within body is also next level science .

Personally , I don't believe in faces of Gods but i have experience the various energy patterns within my mind .


May be in advanced stages it could get enhanced.......but the flow of sperm in upwards direction to the mind with vibrations creates various energy patterns at different stages with time .

Brahmacharya is important fact to feel this feeling and experience .


Knowing the names of god is not that much fascinating but Experiencing the whole universe vibrations within body is wonderful feelings.......can not be explained in words .


Perhaps the advanced stages are also there.....but overall it's Greatest thing that could be ever experienced .

Brhmacharya Ashram were important part of our life in ancient Bharat .

But invasions destroyed these great rules from society .


Now power of Brhmacharya has forgotten .

Youths are wasting their potential for momentary pleasure .

There was a time......

When Men were like Lord Lakshman who cut the nose of Suprnakha to protect own Brhmcharya

When Women accepted burning in fire to protect holiness of their character ( Jauhar Pratha Started after Mughal invasion ).......



Nowadays , Sex is being like playing games . There is no matter of morals .


In society ,

Insecurity is increasing because people are lacking of morals - values .

( Personally i don't accept any physical relation before marriage because it's cheating with mine parents faith in me......cheating on my future......cheating on mine own identity and i think it's a responsibility for a healthy society for everyone )

So called liberals making things confusing for youth generations .


Valentine Day !

a festival is launched to destroy youths.....

Before second world war there was no such festival . But after invention of human organ transplant.....international human trafficking Gangs started it with co-operation of other business company ( You may checkout the purchasing of condoms - ipills are dramatically increased in these days )

Just think for a while !

What will happen if majority of people follow Morals ?

How many business will be closed ?

How environment will be affected ?

How many great consequences will be there in society ?



I am not like everyone......

I don't see things like everyone......

I don't live my life like everyone.........


Anyway,


Reestablishing the culture is Challenging but once it's get done then our nation could lead whole world towards peace and higher aspects of Science .



- Akash Aryavart









Jan 22, 2021

परमात्मा और आत्मा

गीता - वेद - पुराण - उपनिषद में कहा गया है 

" हर कण व् जीव में आत्मा का वास है "

अतः हर जीव को हमारे धर्म में सम्मान व् आदर भाव से देखा गया है |

जब मनुष्य सहज भाव से जन्म लेता है व् विकसित होता है तो वह स्वतः परमात्मा होता | उसके मन में छल - कपट - द्वेष - मिथ्या जरा भी नहीं होता |

जब आत्मा विशुद्ध होती है तो मनुष्य एक असत्य भी नहीं बोलता | उसकी जिह्वा कांपने लगती है | क्योंकि उसके तन में जो आत्मा है वह ही परमात्मा है और परमात्मा सदैव पवित्र - पूजनीय है | ऐसा मनुष्य स्वयं परमात्मा है जिसकी आत्मा पवित्र है |

जब हम कोई गलत कार्य करते हैं तो आत्मा से एक आवाज आती है 

" यह मत कर "

यही आत्मा में परमात्मा की आवाज है  |


जब पहली बार कोई गलत कार्य करता है तो यह यह परमात्मा की शक्ति उसे रोकती है | चाहे वह असत्य बोलना हो - जीव हत्या हो - व्यसन करना हो - छल करना हो - वासना में वशीभूत होना हो - पाप में लिप्त होना हो |


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किन्तु जब बारम्बार असत्य - पाप युक्त कार्य किये जाते हैं तो यह परमात्मा मानव के आत्मा से पृथक हो जाती है |

उसे अपने असत्य - पाप - नीचता में कोई दोष नहीं दिखाई देता है |

जिस व्यक्ति के आत्मा में से परमात्मा का अंत हो चूका हो वह मानवता के लिए अभिशप्त हो जाता है |

वह व्यक्ति असत्यवादी - पापी - नीच - व्यसनी बन असुर बन जाता है |

जिस सीमा तक मानव शरीर में परमात्म अंश जीवित है वह उस सीमा तक मनुष्य है |


एक बार परमात्म अंश के पूर्णतः मृत हो जाने पर इसका उत्थान असंभव है | जब तक कोई परमात्म अंश से पूर्ण व्यक्ति अपने तरंग प्रवाह से देवांश को स्थापित न करे | ( बाल्मीकि - रत्नाकर की कथा में रत्नाकर को दिव्य ज्ञान सप्त ऋषियों द्वारा इसी तरंग प्रवाह से स्थापित कर उसकी आत्मा में परमात्म तत्व का पुनर्स्थापन किया गया था )




सामान्य जीवन में इन पापियों - दुराचारियों - व्यव्सनियों से दूर रहने में ही भलाई है | क्यूंकि इनके अन्दर अहंकार - पशुता - वासना वैसे ही टपकती  रहती है जैसे पागल  कुत्ते के मुह से लार | 

प्रतिकार या आक्रमण इनका तभी करें जब ये मर्यादा की सीमा को लाँघ जाएँ | 


- आकाश आर्यावर्त 










Jan 21, 2021

The Queen

A Girl with Good Physic could be good for A Night !
A Girl with Pretty Face could be good for A Month !
A Girl with Talented Mind could be good for A While !

But

In Absence of Character

All of them are Useless for Life .


Good Physic can be hired !
Pretty Face can be hired !
Talented Mind can be hired !
Money can be Earned !


But 

No one Can Hire or Earn........

Morals !
Values !
Character !
Loyalty !
Pride !
Vision !


bhagwa , marathi , love , the pure love , akash aryavart



All These are Qualities of Queen .


Fall in Love with Soul - Heart - Mind - Character not Outlook .


Soul - Heart - Mind - Character is reflection of Pure Identity of Human .

Fall in Love with Pure Identity

Not identity of Body which is just clothe of soul 

- Akash Aryavart

Compromise ?

 Never Settle Down for less Than what you deserve !

Never Compromise on Anything Less Than Your Worth !


Remember Who You Are !

Don't Compromise for Anyone !

Don't Compromise for Any Reason !





Live The Truth !

Live The Real You !


Never Down Your Standards for Anything and Anyone !


When You Compromise with Anything Less Than Your worth then Your Real worth will die .


Have patience !

Keep Going for your real worth !

Keep Upgrading for your real cost !


Compromise for Your Dream..........Yes !

But

Compromise on Dreams..................Never !


And if i will chose someone then that person will be part of my Dream......and i can not make it undervalued at any cost !




Dear !


Be Strong Enough To Let Go.....


Patient Enough To Wait for What You Truly Deserve .


Don't Complain !

Don't Compromise !


Keep Upgrading Yourself 


Be with Someone Who Can Match Your Character !

Be with Someone Who Can Match Your Ambitions !

Be with Someone Who Can Match Your Values !

Be with Someone Who Can Make A Compassion !

Be with Someone Who Can Make Mutual Bonding !


Be willing to....

Live with Real You and Real One !

Live with True You and True One !






Otherwise....

Your Best Friend is Within You !


Let them say it's Attitude !

Only A Strong Woman Can Handel A Strong Man

for Bitches it's Attitude......


It's just Standard not Attitude.....Bitches !

Go and get fucked with duffers .


My eyes and whole dedication is reserved for my Queen Only .


I am not Your Cup of Tea !


 - Akash Aryavart